भारत अंतरिक्ष विज्ञान में इतिहास रचने के करीब था, लेकिन चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का लैंडिंग से महज 69 सेकंड पहले पृथ्वी से संपर्क टूट गया। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर विक्रम की शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात 1 बजकर 55 मिनट पर लैंडिंग होनी थी, लेकिन इसका समय बदलकर 1 बजकर 53 मिनट कर दिया गया था। हालांकि, यह समय बीत जाने के बाद भी लैंडर विक्रम की स्थिति पता नहीं चल सकी। इसरो चेयरमैन डाॅ. के. सिवन ने बताया, ‘‘लैंडर विक्रम की लैंडिंग प्रक्रिया एकदम ठीक थी। जब यान चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह से 2.1 किमी दूर था, तब उसका पृथ्वी से संपर्क टूट गया। हम ऑर्बिटर से मिल रहे डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं।’’ अगर लैंडर विक्रम की लैंडिंग की पुष्टि हो जाती तो सुबह 5 बजकर 19 मिनट पर रोवर प्रज्ञान बाहर आता और यह सुबह 5:45 पहली तस्वीर क्लिक कर लेता।
भारतीय स्पेस एजेंसी 'इसरो' के चेयरमैन के. सिवन ने बताया है कि चंद्रयान-2 के 'विक्रम लैंडर' का चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले संपर्क टूट गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल डेटा का आकलन जारी है। गौरतलब है, 2 सितंबर को ऑर्बिटर से अलग हुए विक्रम लैंडर को आज चांद की सतह पर 1:53 AM पर लैंड होना था।
चंद्रयान-2 के 'विक्रम लैंडर' से संपर्क टूटने के बाद इसरो के वैज्ञानिकों को संबोधित कर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निकल रहे थे तब इसरो प्रमुख के. सिवन रोने लगे। यह देखकर मोदी ने उन्हें गले लगाया और खुद भी भावुक हो गए। संबोधन में मोदी ने कहा था, "मैं गर्व से कहता हूं...कोशिश बेहतरीन थी और यह यात्रा भी।"


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