राजस्थान में जून 2026 तक कुल 5 रामसर स्थल घोषित किए जा चुके हैं। हाल ही में मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स और खीचन वेटलैंड को शामिल किए जाने के बाद यह विषय प्रतियोगी परीक्षाओं UPSC, SSC, LDC, RAS, REET, 2nd Grade और CETके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
राज्य की प्रमुख रामसर आर्द्रभूमियों की सूची इस प्रकार है:
1. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) - 1981 में घोषित
2. सांभर झील (जयपुर/नागौर) - 1990 में घोषित
3. खीचन पक्षी अभयारण्य (फलौदी) - जून 2025 में घोषित
4. मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स (उदयपुर) - जून 2025 में घोषित
5. सिलीसेढ़ झील (अलवर) - दिसंबर 2025 में घोषित
राजस्थान में अब तक 5 स्थलों को रामसर स्थल के रुप में मान्यता दी गई है जो निम्न हैं
1. केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान :- 1 अक्टूबर 1981 को भारत की पहली रामसर साइट्स में से एक के रूप में नामित किया गया था।
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (जिसे पहले 'भरतपुर पक्षी अभयारण्य' कहा जाता था) जो राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध पक्षी विहार है यहां 370 से अधिक पक्षी प्रजातियों और लुप्तप्राय साइबेरियाई सारस के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र है। यह उद्यान 28.73 वर्ग किलोमीटर में फैला यह पार्क क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है।
इसे वर्ष 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र का दर्जा दिया गया साथ ही, यह भारत के पहले 'रामसर स्थलों' में से एक है।
2. सांभर झील :- सांभर झील की पारिस्थितिक और जैविक महत्व को देखते हुए 1990 में इसे अंतर्राष्ट्रीय महत्व की रामसर आर्द्रभूमि (Ramsar Site) घोषित किया गया था।
विशेपता :- सांभर झील नमक उत्पादन की सबसे बड़ी झील मानी गई है जो भारत के कुल नमक उत्पादन का लगभग 9% हिस्सा पैदा करती है। यहाँ सदियों से नमक बनाने का काम हो रहा है, जिसे 'हिंदुस्तान साल्ट्स' (Hindustan Salts) द्वारा संचालित किया जाता है。
स्थान: राजस्थान में जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और अजमेर से 64 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है
फ्लेमिंगो और अन्य प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण।
3. मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स :- राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध मीठे पानी का मानसूनी आर्द्रभूमि क्षेत्र है, जिसे जून 2025 से अंतर्राष्ट्रीय 'रामसर स्थल' का दर्जा प्राप्त है।
इसे "पक्षी गांव" (Bird Village) के नाम से भी पुकारा जाता है।
प्रसिद्धि: सामुदायिक स्तर पर पक्षी संरक्षण के प्रयासों के लिए जाना जाता है।
मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स तीन प्रमुख तालाबो— ब्रह्म तालाब, ढांढ तालाब और खेरोदा तालाब— और उनसे जुड़ी कृषि भूमि से मिलकर बना है।
4. खींचन वेटलैंड :- राजस्थान के फलोदी जिले में स्थित खींचन वेटलैंड विश्वविख्यात डेमोइसेल क्रेन (जिन्हें स्थानीय रूप से 'कुरजां' कहा जाता है) की विशाल शीतकालीन आबादी के लिए प्रसिद्ध है। जिसे 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इसे आधिकारिक तौर पर रामसर स्थल (Ramsar Site) का दर्जा दिया गया था।
हर साल सर्दियों में यहाँ 22,000 से भी अधिक कुरजां (Demoiselle Cranes) प्रवास के लिए मंगोलिया और यूरेशिया से आती हैं। यह क्षेत्र कुल मिलाकर 150 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है।
5. सिलीसेढ़ झील :- राजस्थान के अलवर जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक झील है। सिलीसेढ़ झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिसंबर 2025 से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि (Ramsar Site) का दर्जा प्राप्त है।
इस झील का निर्माण 1845 में अलवर के महाराजा विनय सिंह द्वारा अलवर शहर में पानी की आपूर्ति करने और रानी शीला देवी के लिए बनाया गया था। उन्होंने रूपारेल नदी की एक सहायक नदी पर बांध बनाकर इस झील को बनवाया था।
यह राजस्थान की 5वीं और देश की ~96वीं रामसर साइट है।
अतिरिक्त जानकारी:
5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को देश का 100वां रामसर स्थल घोषित किया गया है।
रामसर स्थल क्या है:- अन्तर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां (Wetlands) होती हैं, जिन्हें जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के लिए वैश्विक मान्यता दी जाती है।
राजस्थान के रामसर स्थलों का महत्व
⏩प्रवासी पक्षियों का संरक्षण
⏩जैव विविधता का संरक्षण
⏩स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा
⏩राजस्थान का पहला रामसर स्थल कौन सा है?
⏩राजस्थान में कुल कितने रामसर स्थल हैं?
⏩खीचन वेटलैंड किस जिले में स्थित है?
⏩भारत का 100वां रामसर स्थल कौन सा है?
अभ्यास प्रश्न
भारत के किस राज्य में सबसे अधिक रामसर स्थल है?
A) तमिलनाडु
B) कर्नाटक
C) तेलंगाना
D) उत्तर प्रदेश
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