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बुधवार, 17 जून 2026

राजस्थान में भौगोलिक संकेतक (GI) दर्जा वाले उत्पाद 2026 : नाम सुची व सम्पूर्ण विवरण

राजस्थान में अब तक 22 प्रसिद्ध और पारंपरिक उत्पादों को GI टैग (भौगोलिक संकेतक) मिल चुका है। ये उत्पाद राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, हस्तशिल्प और कृषि विरासत को दर्शाते हैं।

भौगोलिक संकेतक (GI) टैग क्या है:-
भौगोलिक संकेतक (GI) टैग एक ऐसा चिह्न है, जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जिनका उद्भव किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से होता है तथा जिनकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषताएँ उस स्थान से विशिष्ट रूप से जुड़ी होती हैं।
(श्रेणी के अनुसार) नीचे दी गई है: 
1. हस्तशिल्प और कला 
ब्लू पॉटरी – जयपुर के प्रसिद्ध चीनी मिट्टी के बर्तनों पर नीले रंग की बेहद खूबसूरत चित्रकारी (इसे वर्ष 2008 में लोगो को 2017 में GI टैग मिला हुआ है।
कठपुतली :- राजस्थान की पारंपरिक काष्ठ और कपड़े से बनी धागा-कठपुतलियां। जिसे वर्ष 2008 में भौगोलिक संकेतक दर्जा प्राप्त वहीं कठपुतली लोगों को 2017 में GI टैग का दर्जा दिया गया।
थेवा कला – प्रतापगढ़ जिले में रंगीन कांच पर सोने की बेहद महीन और आकर्षक नक्काशी और कांच पर सोने का काम व नक्काशी 
GI टैग - वर्ष 2008
मोलेला मिट्टी कला – राजसमंद: मोलेला गांव की प्रसिद्ध टेराकोटा (मिट्टी) की मूर्तियां और धार्मिक फलक।
GI टैग का दर्जा:- 2008 वहीं मोलेला के लोगों को 2017 में GI का दर्जा दिया।
पोकरण पॉटरी  – जैसलमेर: पोकरण क्षेत्र के पारंपरिक और कलात्मक मिट्टी के बर्तन।
GI टैग का दर्जा:- 2018
नाथद्वारा पिछवाई कला : भगवान श्रीनाथजी के पीछे पृष्ठभूमि में लगाई जाने वाली पारंपरिक कपड़े पर की गई पेंटिंग्स।
GI टैग का दर्जा:- 2023
उदयपुर की कोफ्तगारी मेटल क्राफ्ट : लोहे पर सोने और चांदी के पतले तारों से की जाने वाली सुंदर नक्काशी।
GI टैग का दर्जा:- 2023
बीकानेरी उस्ता कला : ऊंट की खाल पर की जाने वाली सोने की बेमिसाल नक्काशी और कारीगरी।
GI टैग:- 2023
जोधपुरी बंधेज  – जोधपुर: पारंपरिक बांधकर रंगने की कपड़ा कला।
भौगोलिक संकेतक दर्जा:- 2023

2. वस्त्र और टेक्सटाइल 
कोटा डोरिया – कोटा: अपने हल्के वजन, बारीक बनावट और चौकोर (चेक) डिजाइन के लिए प्रसिद्ध रेशम और सूती मिक्स साड़ियां।
भौगोलिक संकेतक दर्जा:- 2005 में वही कोटा डोरिया लोगों को 2010 में भौगोलिक संकेतक GI टैग मिला।
सांगानेरी प्रिंटिंग – जयपुर: सफेद या हल्के बैकग्राउंड पर प्राकृतिक रंगों से हाथ से की जाने वाली ब्लॉक छपाई।
GI टैग का दर्जा:- 2010
बगरू प्रिंटिंग  – जयपुर: प्राकृतिक और मिट्टी के रंगों (जैसे काला और मटियाला) से की जाने वाली बोल्ड ब्लॉक छपाई।
GI टैग का दर्जा:- 2011
बीकानेर कशीदाकारी शिल्प : कपास, रेशम और मखमल पर बारीक सुई-धागे और शीशे (मिरर) का काम।
GI tag का दर्जा:- 2023
फुलकारी : यह राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की एक रंग बिरंगे धागों से कशीदाकारी वाली साझा पारंपरिक कढ़ाई कला है।
GI टैग का दर्जा:- 2010

3. खाद्य उत्पाद 
बीकानेरी भुजिया– बीकानेर: बेसन व मोठ की दाल और मसालों से तैयार होने वाला विश्व प्रसिद्ध कुरकुरा और तीखा नमकीन।
GI टैग का दर्जा:- 2010

4. कृषि और प्राकृतिक उत्पाद 
मकराना मार्बल – नागौर: यह भारत का पहला GI टैग प्राप्त 'प्राकृतिक पत्थर' है, जिसका उपयोग ताजमहल के निर्माण में भी हुआ था। जिसे 2015 में भौगोलिक संकेतक (GI) का दर्जा दिया गया है।
सोजत मेहंदी  – पाली: 2021 में भौगोलिक संकेतक प्राप्त अपने गहरे लाल-रंग और उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध प्राकृतिक हिना मेहंदी है।
नागौरी अश्वगंधा – नागौर: 2025 में प्राप्त भौगोलिक संकेतक वाली औषधीयों गुणों से भरपूर उच्च गुणवत्ता वाली अश्वगंधा (जड़ी-बूटी) है।
सांगरी: राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पाई जाने वाली खेजड़ी के पेड़ की फली, जिसका उपयोग प्रसिद्ध पंचकूटा सब्जी में किया जाता है।

विशेष तथ्य:
किसी उत्पाद को GI टैग मिलने से उसकी प्रामाणिकता (Authenticity) बनी रहती है और कोई अन्य क्षेत्र उस नाम का दुरुपयोग नहीं कर सकता। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के स्थानीय कारीगरों और किसानों को बेहतर मूल्य और पहचान मिलती है।
भारत में GI टैग का प्रबंधन भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत किया जाता है। GI पंजीकरण कार्यालय (GI Registry) चेन्नई में स्थित है।

:- राजस्थान में कितने GI Tag उत्पाद हैं?

:- राजस्थान का नवीनतम GI Tag उत्पाद कौनसा है?

:- GI Tag क्या होता है?





भारत में अब तक कुल कितने उत्पादों को भौगोलिक संकेतक दर्जा दिया गया है? कमेंट बॉक्स लिखिए 

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